यही कटे थे रावण ने अपने 10 सर, और चढ़ा दिया था भगवन शिव पर

देवघर यानि “देवताओ का निवास स्थान” । भारत के झारखंड राज्य स्थित देवघर एक पवित्र धार्मिक स्थल है, जो अपने बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए पूरे भारतवर्ष में प्रशिद्ध है। झारखण्ड राज्य के संथाल परगना का यह जिला एक प्रमुख हिंदू तीर्थस्थल है। जहां सावन के पवित्र महीने में बोल-बम का जयकारा लगाते हुए भारत को कोने-कोने से शिवभक्त यहाँ दर्शन करने पहुंचते हैं। यह भारत के सबसे प्राचीनतम स्थलों में भी गिना जाता है जहां आज भी बौद्ध मठों के खंडहरों के अवशेषो को देखा जा सकता है। यह तीर्थस्थान झारखण्ड की राजधानी रांची शहर से 250 किमी दूर 833 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहाँ प्रतिवर्ष श्रावण मास के दौरान श्रावणी मेला में यहां लाखों की तादाद में शिवभक्त १०५ किलोमीटर की पैदल यात्रा करके ज्योतिर्लिंग पर जल चढ़ाने आते हैं।

बाबा बैद्यनाथ धाम की अलौकिक तस्वीर
देवघर का सबसे मुख्य आकर्षण केंद्र यहां स्थित बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक बाबा बैद्यनाथ मंदिर है। इसके अलावा यहाँ कई अन्य देवी-देवताओं के भी मंदिर यहां स्थित हैं। यह धार्मिक स्थल एक पौराणिक मान्यता भी जुड़ी हुई है, माना जाता है कि रावण ने देवघर के इसी मंदिर में भगवान शिव की पूजा की थी और अपने 12 सिरों को बलिदान भेट स्वरुप चढ़ाया था, जिसके बाद भोलेनाथ एक वैद्य के रूप में रावण के ठीक करने के लिए आए थे। इसी पौराणिक घटना की वजह से इस मंदिर नाम बाबा बैद्यनाथ पड़ा। यह मंदिर भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है, जहां दो मंदिर देवी पार्वती को समर्पित हैं, जो शिवशक्ति के पवित्र बंधन को प्रदर्शित करते हैं।

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